मंडला | जबलपुर–मंडला नेशनल हाईवे
बीजाडांडी थाना क्षेत्र के घने जंगलों में सालभर से चल रही कथित RTO चेकिंग आखिरकार सवालों के कटघरे में आ ही गई। इस पूरे मामले को प्रदेश की न्यूज़ ने बिना दबाव और बिना डर के ज़मीनी स्तर पर उठाया—और यही सच्ची पत्रकारिता की असली पहचान है।
स्थानीय ट्रक चालकों और परिवहन से जुड़े लोगों की लंबे समय से शिकायत थी कि जंगल के बीच 2 से 4 ट्रकों को एक साथ रोककर घंटों चेकिंग की जाती है। इससे न सिर्फ यातायात बाधित होता है, बल्कि चालकों को आर्थिक नुकसान और मानसिक परेशानियों का भी सामना करना पड़ता है।
“आदेश है”—लेकिन दिखाने से इनकार
मौके पर मौजूद महिला ने पहले अपना नाम वंदना परस्ते बताया और स्वयं को RTO अधिकारी बताते हुए चेकिंग का दावा किया। जब उनसे लिखित आदेश दिखाने को कहा गया, तो पहले हामी भरी गई, लेकिन बाद में यह कहकर टाल दिया गया कि “हम आदेश लेकर नहीं घूमते।”
RTO संतोष पाल ने किया साफ इनकार
पत्रकार जसवंत सिंह राजपूत ने जब सीधे RTO संतोष पाल से संपर्क किया, तो उन्होंने किसी भी प्रकार के आदेश या चेकिंग पॉइंट की अनुमति देने से साफ इनकार कर दिया। यहीं से पूरा मामला और गंभीर हो गया—जब आदेश ही नहीं है, तो यह चेकिंग किस अधिकार से?
मौके की पड़ताल ने खोली अवैध वसूली की परतें
ग्राउंड रिपोर्टिंग में यह भी सामने आया कि ट्रक चालकों और हाइवा संचालकों से RTO के नाम पर खुलेआम अवैध वसूली की जा रही थी। खुद को अधिकारी बताने वाली महिला और उनके साथ मौजूद स्टाफ की भूमिका पर गंभीर सवाल खड़े हो गए।
प्रशासन तक पहुंची बात, FIR और निलंबन की तैयारी
मामला उजागर होने के बाद कलेक्टर महोदय से औपचारिक चर्चा की जा चुकी है। उपलब्ध तथ्यों और आरोपों के आधार पर संबंधित अधिकारी-कर्मचारियों के विरुद्ध आपराधिक प्रकरण (FIR) दर्ज कराने और विभागीय कार्रवाई के तहत निलंबन की प्रक्रिया शुरू करने की तैयारी की जा रही है।
पत्रकारिता का असली मतलब
यह पूरा घटनाक्रम एक बार फिर साबित करता है कि जब पत्रकारिता ज़मीन से जुड़कर, तथ्यों के साथ सवाल पूछती है, तो व्यवस्था को जवाब देना ही पड़ता है। प्रदेश की न्यूज़ और संवाददाता जसवंत सिंह राजपूत की यह रिपोर्ट न सिर्फ साहसिक है, बल्कि आम जनता की आवाज़ भी है!