अशोकनगर।
जिले के देहात थाना क्षेत्र अंतर्गत कुडीघाट, कोलुआ रोड पर रहने वाले एक दलित परिवार के साथ गंभीर मारपीट, जातिगत अपमान और पुलिसिया लापरवाही का मामला सामने आया है। पीड़िता मंजू विमल ने आरोप लगाया है कि उनके पति को पड़ोसियों द्वारा बेरहमी से पीटने के बाद उल्टा झूठे प्रकरण में फंसाकर जेल भिजवा दिया गया।
पीड़िता के अनुसार घटना 12 दिसंबर की शाम लगभग 7 बजे की है, जब उनके पति घर पर मौजूद थे। तभी पड़ोसी राजपाल यादव, उनकी पत्नी भूरीबाई यादव एवं उनके पुत्र सहित तीन अज्ञात लोगों ने उनके पति के साथ विवाद शुरू किया और जातिसूचक गालियाँ देते हुए उन्हें जबरन अपने घर में खींच ले गए, जहाँ उनके साथ गंभीर मारपीट की गई।
घटना की सूचना देने पीड़िता जब देहात थाना पहुँची तो पुलिस मौके पर पहुँची और उनके पति को आरोपियों के घर से निकालकर थाने ले गई। आरोप है कि इसके बाद जब पीड़ित पक्ष ने थाने में रिपोर्ट दर्ज करानी चाही तो पुलिस ने उनकी शिकायत दर्ज नहीं की और अगले दिन तहसीलदार के समक्ष पेश कर पीड़ित युवक को जेल भेज दिया गया।
पीड़िता का आरोप है कि जमानत के दौरान पुलिस को घटना के वीडियो साक्ष्य एवं सीसीटीवी फुटेज उपलब्ध कराने के बावजूद पुलिस ने उन्हें देखने से इनकार कर दिया और बिना निष्पक्ष जांच के एकतरफा कार्रवाई की गई।
पीड़िता ने यह भी बताया कि आरोपीगण पूर्व में भी उन्हें लगातार जातिगत रूप से अपमानित करते रहे हैं, नाली का पानी निकालने से रोका गया है तथा शासकीय नाली पर अवैध दीवार खड़ी कर दी गई है। विरोध करने पर “चमारों का पानी यहाँ नहीं बहने देंगे” जैसे अपमानजनक बयान दिए जाते हैं। साथ ही जान से मारने और बुलडोजर चलवाने की धमकियाँ भी दी जा रही हैं।
पीड़िता का कहना है कि आरोपी राजपाल यादव पहले से ही एक अन्य मामले में जमानत पर बाहर है। हाल ही में तहसील कार्यालय के बाहर भी भूरीबाई यादव द्वारा खुलेआम जान से मारने की धमकी दी गई, जिससे पूरा परिवार भय के साए में जीवन यापन कर रहा है।
पीड़िता मंजू विमल ने पुलिस अधीक्षक अशोकनगर से मामले की निष्पक्ष जांच कर दोषियों के खिलाफ सख्त वैधानिक कार्रवाई, एससी/एसटी एक्ट के तहत प्रकरण दर्ज करने तथा आरोपी की जमानत निरस्त कराने की मांग की है।