किसी को उस शब्द पर आपत्ति नहीं हुई थी... उल्टा चंद्रशेखर को नायक की तरह पेश किया गया...कंगाना राणावत को सीआरपीएफ की महिला सिपाही ने थप्पड़ मारा ,पूरा सोशल मीडिया उसको किसान की बेटी की उपाधि देकर तारीफों के पुल बांधने लगा..
HDFC में कार्यरत इस लड़की पर अभी फूलों की वर्षा हो रही होती अगर यह कहती -
- कमेरों की बेटी हूं ऐरा गैरा मत समझ लेना..
- वीर अहीरों की वंशज हूं ऐरा गैरा मत समझ लेना...
- गुज्जर की बेटी हूं कतई वहम में मत रहियो...
- छोरी जाटां की हूं ..
- किसान घर से हूं,धरती फाड़ देने वाली कौम की ।ऐरा गैरा मत समझ लेना...
- शिवाजी महाराज की वंशज हूं कूर्म क्षत्रिय वंश की ,ऐरी गैरी मत समझ लेना...
- अखंड भारत के निर्माता सम्राट अशोक की वंशज हूं,ऐरी गैरी मत समझ लेना..
और सबसे बड़ी बात इस लड़की की पूजा हो रही होती , देश की आवाज़, संविधान रक्षक , लोकतंत्र रक्षक और न जाने क्या क्या बन चुकी होती, अगर इसने कहा होता -
"बाबा साहब की बेटी हूं, संविधान मेरे बाबा ने लिखा है ,ऐरी गैरी मत समझ लेना"
मगर इसने गलती कर दी, जो कहा ठाकुर की बेटी हूं...अब यह सामंतवादी हो गई है..लेकिन फिर भी गनीमत है जो इसने ये नहीं कहा ब्राह्मण हूं, अन्यथा यह सामंतवादी के साथ साथ मनुवादी, विदेशी, शोषक, पीड़क, यूरेशियन हो चुकी होती...