मकर संक्रांति की खुशियां बदली मातम में, भीषण हादसे में 7 महिलाओं की मौत, मां, भाभी और पत्नी का शव....Sikar: एक साथ मां, भाभी और पत्नी का शव देखकर स्तब्ध हुआ युवक, कांपते हाथों से पहुंचाया अस्पताल, दर्दनाक हादसे में 7 महिलाओं की मौत

 सीकर के हरसावा में हुए दर्दनाक सड़क हादसे ने पूरे इलाके को झकझोर कर रख दिया। एक ही परिवार की मां, भाभी और पत्नी सहित 7 महिलाओं की एक साथ मौत ने गांव को शोक में डुबो दिया। Rajasthan Road Accident: दुख और दर्द की ये कल्पना भी दहला देने वाली है। आंखों के सामने पहले हादसे में कचूमर हुई परिवार की कार और फिर उनमें फंसे मां, पत्नी और भाभियों के खून से सने शवों को देखना किसी भी इंसान का कलेजा कंपा सकता है। पर यही खौफनाक मंजर हरसावा में हादसे का शिकार हुई महिलाओं के पीछे ही गाड़ी में आ रहे परिवार के पुरुषों को देखना पड़ा।

हादसा देखते ही एकबारगी तो सब सन्न रह गए। बाद में चीखते-पुकारते हुए कार तक पहुंच उनमें जिंदगी तलाशने लगे। सबसे पहले मोहनी देवी के बेटे ललित कार के पास पहुंचकर हताहतों को निकालने में जुटे। बाद में अन्य 6-7 लोग भी दौड़कर पहुंचे। अपनी आंखों के सामने उजड़ चुके परिवार को देखना और कांपते हाथों से अपनों के शवों को बाहर खींचकर निकालना ऐसा मंजर था, जिसने वहां मौजूद हर शख्स की रूह तक को रुला दिया। दो मिनट पहले ही निकले थे आगे
जानकारी के अनुसार जिस कार में महिलाएं सवार थीं वह पहले सबसे पीछे चल रही थी। दो मिनट पहले ही कार चालक ने आगे चल रही परिवार के पुरुषों की कार को ओवर टेक करते हुए पीछे किया था। इसके कुछ देर बाद ही वह कार हादसे का का शिकार हो गई।

पूरा गांव स्तब्ध
हरसावा हादसे में एक पल में मां की ममता, बेटी की मुस्कान और दो बहुओं सहित सात महिलाओं की गृहस्थी उजड़ने से पूरा गांव स्तब्ध व निशब्द हो गया। घटना की सूचना के बाद से परिवार में मातम छा गया तो मकर सक्रांति की मौज—मस्ती के बीच गांव में अचानक माहौल मौन में बदल गया। जहां कुछ देर पहले पर्व की खुशियां थीं, वहां खौफनाक खामोशी छा गई। हर कोई मोहनी देवी के घर को देखकर ही सहम रहा था। दबे स्वर में कोई सभी महिलाओं को एक ही कार में नहीं बिठाने पर हादसे से बचने की कल्पना कर रहा था तो महिलाओं से रौनक परिवार में नजर लगने की बातें भी जहां-तहां होती रही। घर की थी कार, किराये का था चालक
जानकारी के अनुसार मृतकों के परिवार में फिल्टर पानी व वाहनों का कारोबार है। अंत्येष्टि में शामिल होने के लिए परिवार व रिश्तेदार चार गाड़ियों में सवार होकर गए थे। मृतक परिवार की दो गाड़ियां घर की ही थी। जिनमें से हादसे का शिकार हुई कार के लिए परिवार ने चालक वसीम को किराए पर लिया था। जबकि जिस गाड़ी में पुरुष सवार थे, उसे मोहनीदेवी का बेटा ललित चला रहा था।

सुविधा के लिए महिलाओं को दी अलग कार
जानकारी के अनुसार अंत्येष्टि में परिवार के करीब 16 सदस्य थे। जिनमें आठ महिलाएं थी। पुरुषों के बीच महिलाओं को किसी तरह की असहजता ना हो, ये देखते हुए परिवार ने सभी को अलग कार में बिठाया गया था। बाद में यही कार हादसे में 7 महिलाओं को लील गई।

ट्रॉमा सेंटर और मोर्चरी के बाहर भी वही दृश्य था
रोते हुए घटना के बाद ट्रॉमा सेंटर पर भी ग्रामीणों और जनप्रतिनिधियों की भीड़ जुट गई। हर कोई परिवार को ढाढ़स बंधा रहा था। लोग यही कह रहे थे कि सुबह तक सब कुछ सामान्य था और शाम होते-होते पूरा परिवार उजड़ गया। सूचना पर विधायक हाकम अली खान, भाजपा नेता इंजी. श्रवण चौधरी, मधुसूदन भिंडा, सभापति मुश्ताक नजवी आदि भी मौके पर पहुंचे।

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