शिवपुरी/कोलारस। सूचना का अधिकार अधिनियम, 2005 के तहत मांगी गई जानकारी को लेकर उप पंजीयक कार्यालय कोलारस विवादों में आ गया है। आरटीआई एक्टिविस्ट एवं अधिवक्ता जयपाल सिंह यादव ने आरोप लगाया है कि उनके द्वारा मांगी गई अभिलेखों एवं दस्तावेजों की प्रमाणित प्रतियां उपलब्ध कराने के बजाय कार्यालय द्वारा उन्हें संपदा 2.0 पोर्टल से जानकारी प्राप्त करने की सलाह दी गई।
प्राप्त दस्तावेजों के अनुसार जयपाल सिंह यादव ने 20 जून 2006 से 18 जून 2026 की अवधि के दौरान ग्राम इमलौदा, मड़वासा एवं टोरिया में अनुसूचित जनजाति (आदिवासी) वर्ग की भूमि से संबंधित रजिस्ट्री मामलों की जानकारी मांगी थी। आवेदन में खसरा नंबर, रकबा, विक्रेता एवं क्रेता का नाम, रजिस्ट्री क्रमांक, अनुमति आदेशों की प्रमाणित प्रतियां तथा संबंधित अधिकारियों की जानकारी उपलब्ध कराने का अनुरोध किया गया था।
आवेदक का कहना है कि सूचना का अधिकार अधिनियम नागरिकों को अभिलेखों की प्रमाणित प्रतियां प्राप्त करने का अधिकार देता है। ऐसे में केवल पोर्टल का हवाला देकर सूचना उपलब्ध नहीं कराना अधिनियम की भावना के विपरीत है।
जयपाल सिंह यादव ने कहा कि यदि नियमानुसार जानकारी उपलब्ध नहीं कराई गई तो वे प्रथम अपील दायर करेंगे तथा आवश्यकता पड़ने पर मध्य प्रदेश राज्य सूचना आयोग और न्यायालय की शरण लेंगे।
उन्होंने कहा कि उनका उद्देश्य किसी व्यक्ति विशेष को निशाना बनाना नहीं, बल्कि सार्वजनिक संपत्तियों, आदिवासी भूमि, चरनोई एवं गोचर भूमि से जुड़े मामलों में पारदर्शिता और जवाबदेही सुनिश्चित कराना है।
जयपाल सिंह यादव ने कहा"आरटीआई के तहत मांगी गई प्रमाणित प्रतियां उपलब्ध कराना विभाग की जिम्मेदारी है। यदि जानकारी नहीं दी जाती है तो मैं वैधानिक प्रक्रिया के तहत अपील और आयोग का दरवाजा खटखटाऊंगा।"
— जयपाल सिंह यादव, अधिवक्ता एवं आरटीआई एक्टिविस्ट
(नोट: मामले में उप पंजीयक कार्यालय का पक्ष प्राप्त होने पर उसे भी प्रमुखता से प्रकाशित किया जाएगा।)