धान खरीदी केंद्र सहकारिता समिति मवई में लापरवाही व भ्रष्टाचार के गंभीर आरोप*बारदाना संकट, तौल में अनियमितता और प्रशासनिक नियंत्रण के अभाव से किसान संकटग्रस्त


मवई | दिनांक: 07 जनवरी 2026
सहकारिता समिति द्वारा संचालित धान खरीदी केंद्र मवई में भारी लापरवाही एवं संभावित भ्रष्टाचार के गंभीर आरोप सामने आए हैं। किसानों की शिकायतों के अनुसार विगत दो दिनों से बारदाना (बोरों) की कमी के कारण धान खरीदी कार्य ठप पड़ा है, जिससे क्षेत्र के किसान गंभीर आर्थिक संकट में आ गए हैं।
शिकायत प्राप्त होने के उपरांत ब्लॉक कांग्रेस कमेटी मवई के अध्यक्ष संतोष रानू हरदहा द्वारा अपने साथियों के साथ खरीदी केंद्र का स्थलीय निरीक्षण किया गया। निरीक्षण में पाया गया कि किसान ट्रैक्टर-ट्रॉली में धान लेकर दो-दो दिन से केंद्र परिसर में खड़े हैं, लेकिन सहकारिता समिति द्वारा समय पर बारदाना की व्यवस्था नहीं की गई।
धान खरीदी प्रभारी द्वारा यह स्वीकार किया गया कि बारदाना की कमी की सूचना पूर्व में सहकारिता विभाग को लिखित रूप से दी जा चुकी है, इसके बावजूद अब तक आपूर्ति न होना यह दर्शाता है कि सहकारिता समिति मवई एवं संबंधित विभागीय अधिकारियों द्वारा जानबूझकर लापरवाही बरती जा रही है।
किसानों को प्रतिदिन हजारों का नुकसान
बारदाना न होने से किसानों को प्रतिदिन ट्रैक्टर-ट्रॉली का अतिरिक्त भाड़ा देना पड़ रहा है। किसानों के अनुसार प्रति किसान लगभग ₹1000 प्रतिदिन का नुकसान हो रहा है। साथ ही उन्हें भोजन, पानी तथा धान की रखवाली की भी स्वयं व्यवस्था करनी पड़ रही है। यह स्थिति शासन की किसान-हितैषी नीति पर गंभीर प्रश्न खड़े करती है।
धान तौल में हेराफेरी व किसानों से अधिक धान लेने के आरोप
किसानों ने आरोप लगाया है कि सहकारिता समिति मवई द्वारा प्रति किसान लगभग आधा किलोग्राम धान अतिरिक्त लिया जा रहा है। किसानों को यह कहकर गुमराह किया जा रहा है कि “धान सूखता है, इसलिए मेंटेनेंस के नाम पर अधिक लिया जाता है।”
किसानों का कहना है कि इस प्रकार से बड़ी संख्या में किसानों से अतिरिक्त धान की खरीदी की गई, लेकिन भुगतान कम मात्रा के अनुसार किया गया, जो कि सरेआम भ्रष्टाचार और किसानों के साथ धोखाधड़ी है।
शासन द्वारा निर्धारित मानक 40.700 किलोग्राम प्रति क्विंटल के विपरीत 40.900 किलोग्राम तक तौल कराए जाने की शिकायतें भी सामने आई हैं।
इलेक्ट्रॉनिक कांटों पर संदेह, सत्यापन नहीं
धान खरीदी केंद्र में एक इलेक्ट्रॉनिक कांटा खराब होने का हवाला देकर दूसरा कांटा लाया गया है। किसानों का आरोप है कि इलेक्ट्रॉनिक कांटे खराब होने का बहाना बनाकर तौल में हेराफेरी की जा रही है।
सबसे गंभीर बात यह है कि इन इलेक्ट्रॉनिक तौल कांटों का अब तक किसी सक्षम अधिकारी द्वारा सत्यापन नहीं कराया गया है, जिससे यह आशंका और मजबूत होती है कि तौल प्रक्रिया जानबूझकर अपारदर्शी रखी गई है।
प्रशासनिक निरीक्षण का पूर्ण अभाव
धान खरीदी केंद्र मवई में अब तक किसी भी वरिष्ठ प्रशासनिक या सहकारिता विभागीय अधिकारी द्वारा निरीक्षण नहीं किया गया है। मौके पर निरीक्षण से संबंधित कोई अभिलेख उपलब्ध नहीं मिला, जिसके चलते सहकारिता समिति के कर्मचारी अपनी मनमानी करते हुए नियमों की अनदेखी कर रहे हैं।
किसानों का कहना है कि यदि शीघ्र जांच नहीं कराई गई तो यह पता लगाना भी मुश्किल होगा कि अब तक कितने क्विंटल धान की खरीदी में अनियमितता और भ्रष्टाचार हो चुका है।
परिवहन ठप, हजारों क्विंटल धान असुरक्षित
कुछ दिनों से धान का परिवहन कार्य भी बाधित है, जिसके कारण हजारों क्विंटल धान खुले मैदान में आसमान के नीचे पड़ा हुआ है। खरीदी केंद्र में सीसीटीवी कैमरे की कोई व्यवस्था नहीं है, जिससे सुरक्षा व्यवस्था अत्यंत कमजोर है। किसान स्वयं अपनी धान की रखवाली करने को मजबूर हैं।
उच्चस्तरीय जांच की मांग
इस पूरे मामले को लेकर किसानों एवं जनप्रतिनिधियों द्वारा मांग की जा रही है कि धान खरीदी केंद्र सहकारिता समिति मवई की कार्यप्रणाली की उच्चस्तरीय एवं निष्पक्ष जांच कराई जाए। दोषी अधिकारियों व कर्मचारियों पर कठोर कार्रवाई हो तथा किसानों से अतिरिक्त लिए गए धान का उचित भुगतान या समायोजन किया जाए।
यदि समय रहते प्रशासन द्वारा हस्तक्षेप नहीं किया गया, तो यह मामला केवल लापरवाही नहीं बल्कि संगठित भ्रष्टाचार का रूप ले सकता है, जिसकी सीधी मार अन्नदाता किसान पर पड़ रही है।

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