उन पर जातिसूचक अपशब्द कहने, शारीरिक उत्पीड़न कराने और जान से मारने की धमकी देने जैसे आरोप लगाए हैं। होमगार्ड जवानों ने इस संबंध में अपने उच्च अधिकारियों से लिखित शिकायत करते हुए उचित कार्रवाई की मांग की है। वहीं, जांच के बाद होमगार्ड जवानों के आरोप झूठे पाए गए। अधिकारियों का कहना ह कि शिकायतकर्ता अपने आरोपों के समर्थन में कोई ठोस तथ्य या प्रमाण प्रस्तुत नहीं कर सके।इससे पहले डीएम अक्षय त्रिपाठी के आदेश पर जांच कराई गई। जांच में संबंधित दिव्यांग व्यक्ति, तहसील कर्मचारियों तथा शिकायतकर्ता होमगार्ड जवानों के बयान दर्ज किए गए। शिकायत पत्र में कहा गया है कि बुधवार को ड्यूटी के दौरान एसडीएम एक दिव्यांग व्यक्ति को प्रस्तुत करने पर नाराज हो गए और कथित तौर पर जातिसूचक गालियां दीं।
होमगार्ड का आरोप है कि एसडीएम ने अपने गनर एवं चालक को उन्हें दौड़ लगवाने और उठक-बैठक कराने के निर्देश दिए तथा इसका फोटो भेजने को कहा। आरोप है कि इसके बाद उन्हें ड्यूटी स्थल से भगा दिया गया और जान-माल की धमकी भी दी गई।होमगार्ड विभाग की महसी कंपनी के आरक्षी राजाराम शुक्ला, रमाकान्त मिश्र और राम कुमार तिवारी इन दिनों एसडीएम महसी की सुरक्षा ड्यूटी में लगे हैं। तीनों जवानों ने अपने शिकायती पत्र में कहा है कि एसडीएम द्वारा ड्यूटी व्यवस्था में भी मनमानी की जा रही है, जिससे उनकी ड्यूटी 24 से 48 घंटे तक लगातार हो जाती है।