रिश्वत... रिश्वत... रिश्वत और बस रिश्वत. जी हां, बिहार के कई जिलों में किसी विभाग के अंदर चले जाइए. आपका छोटा सा काम हो या बड़ा काम हो. आपका काम वैद्यानिक हो. आपका काम कानूनी तौर पर सही हो. सरकारी विभाग और उसके कर्मचारी को उस काम को करने के लिए वेतन दिया जाता हो. उसी काम के लिए भले विभाग का निर्माण हुआ हो. लेकिन उस विभाग के कर्मचारी आपके चेहरे से पहले आपकी जेब पर नजर डालेंगे. यदि आपने उनकी डिमांड को पूरा कर दिया. आपका काम चुटकी बजाते हो जाएगा. अगर आपने उनकी डिमांड पूरी नहीं की, चढ़ावा नहीं दिया, तो बस आप दौड़ते रहिए. बिहार के कई विभागों की कार्य संस्कृति में रिश्वतखोरी एक पारंपरिक सत्य बनकर रह गई है. निगरानी विभाग छापेमारी करता है. रिश्वतखोर गिरफ्तार हो जाते हैं. उसके बाद वो सेटिंग से दोबारा अपने पद पर काबिज हो जाते हैं.
रिश्वत... रिश्वत... रिश्वत और बस रिश्वत. जी हां, बिहार के कई जिलों में किसी विभाग के अंदर चले जाइए. आपका छोटा सा काम हो या बड़ा काम हो. आपका काम वैद्यानिक हो. आपका काम कानूनी तौर पर सही हो. सरकारी विभाग और उसके कर्मचारी को उस काम को करने के लिए वेतन दिया जाता हो. उसी काम के लिए भले विभाग का निर्माण हुआ हो. लेकिन उस विभाग के कर्मचारी आपके चेहरे से पहले आपकी जेब पर नजर डालेंगे. यदि आपने उनकी डिमांड को पूरा कर दिया. आपका काम चुटकी बजाते हो जाएगा. अगर आपने उनकी डिमांड पूरी नहीं की, चढ़ावा नहीं दिया, तो बस आप दौड़ते रहिए. बिहार के कई विभागों की कार्य संस्कृति में रिश्वतखोरी एक पारंपरिक सत्य बनकर रह गई है. निगरानी विभाग छापेमारी करता है. रिश्वतखोर गिरफ्तार हो जाते हैं. उसके बाद वो सेटिंग से दोबारा अपने पद पर काबिज हो जाते हैं.
byZee Next 24
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