मध्यप्रदेश के जिला अशोकनगर शहर में 29 तारीख को तुलसी सरोवर कॉलोनी से गुमशुदा हुई दलित समाज की बेटी की लाश का खिरिया महू गांव के कुएँ में मिलना, पूरे जिले को झकझोर देने वाली घटना है

। यह केवल एक अपराध नहीं, बल्कि उस व्यवस्था पर सवाल है जो दलितों की सुरक्षा का दावा करती है।
लगातार सामने आ रही ऐसी घटनाएँ यह सोचने पर मजबूर करती हैं कि भारतीय जनता पार्टी की सरकार दलितों पर हो रहे अत्याचारों को रोकने में असफल है या फिर रोकना ही नहीं चाहती। पुलिस की सुस्ती, प्रशासन की चुप्पी और सरकार की उदासीनता अपराधियों के हौसले बढ़ा रही है।
दलित बेटी की हत्या पर केवल औपचारिक बयान नहीं, बल्कि त्वरित गिरफ्तारी, निष्पक्ष जाँच और कठोर सज़ा ज़रूरी है। जब तक न्याय नहीं मिलेगा, तब तक सरकार के “सुशासन” के दावे खोखले ही रहेंगे।

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