मंडला से कविंद्र पटेल की रिपोर्ट
गांव की पगडंडियों से निकलकर अंतरराष्ट्रीय मंच तक अपनी आवाज पहुंचाना आसान नहीं होता, लेकिन मंडला जिले की एक आदिवासी महिला ने यह कर दिखाया है। ग्राम बरखेड़ा, पोस्ट औरई, तहसील बिछिया, जिला मंडला की रहने वाली समाजसेवी श्रीमती रागिनी परते आज महिला सशक्तिकरण की एक सशक्त पहचान बन चुकी हैं।
महज 14 वर्ष की उम्र में सामाजिक चेतना से जुड़ी रागिनी परते का जीवन संघर्षों से भरा रहा। आजीविका के लिए सिर पर लकड़ियों का गट्ठर, पीठ पर बच्चा और 5 से 10 किलोमीटर की पैदल दूरी तय करने वाली रागिनी को समाज द्वारा “ये लकड़ी” जैसे संबोधन ने भीतर तक झकझोर दिया। यही क्षण उनके जीवन का मोड़ बना और उन्होंने महिलाओं व बालिकाओं के अधिकारों के लिए संघर्ष का संकल्प लिया।
स्कूली शिक्षा के साथ-साथ उन्होंने अपने साथियों के साथ सामाजिक चेतना को आगे बढ़ाया। परम श्रद्धेय गुरु एवं सहपाठी स्वर लहरी प्रेम शाह मरावी के साथ गांव-गांव जाकर आदिवासी धर्म, संस्कृति और इतिहास की अलख जगाई तथा सेवा कार्य किए। उनके सतत सामाजिक योगदान के लिए उन्हें कई बार सम्मानित किया गया।
रागिनी परते ने गांव से लेकर प्रदेश स्तर तक कई महत्वपूर्ण दायित्व निभाए हैं। वे जनपद सदस्य, आदिवासी कांग्रेस की प्रदेश महामंत्री, महिला कांग्रेस की जिला अध्यक्ष, रानी दुर्गावती फाउंडेशन की प्रदेश अध्यक्ष, महिला स्वास्थ्य समन्वयक, तेजस्विनी महिला सशक्तिकरण ट्रेनर सहित अनेक पदों पर रहकर कार्य कर चुकी हैं। इसके साथ ही किसान कल्याण, मतदाता पुनरीक्षण, नारी सम्मान योजना और महिला महासंघ से जुड़े कार्यक्रमों में उनकी सक्रिय भूमिका रही है।
राजनीतिक क्षेत्र में भी रागिनी परते की भूमिका उल्लेखनीय रही है। वर्ष 2008 से कांग्रेस की सक्रिय सदस्य के रूप में उन्होंने महिलाओं को राजनीति से जोड़ने का कार्य किया। 2019 के झाबुआ उपचुनाव में कांतिलाल भूरिया की जीत तथा 2021 के रैगांव उपचुनाव में कल्पना वर्मा की विजय में महिला समूहों को संगठित करने में उनकी अहम भूमिका रही। आंदोलनों के दौरान घायल होकर जेल जाने के बावजूद उन्होंने अपने संघर्ष को नहीं छोड़ा। मगधा रोड निर्माण की स्वीकृति के लिए राष्ट्रीय राजमार्ग जाम आंदोलन में भी उनका योगदान यादगार रहा।
उन्होंने गोंडवाना महासभा व अन्य सामाजिक संगठनों के माध्यम से महिला हिंसा, बालिका पलायन, मजदूरी भुगतान, श्रमिक शोषण, आदिवासी भूमि संरक्षण, छात्र-छात्राओं के मार्गदर्शन और महिला स्वास्थ्य जैसे मुद्दों पर लगातार कार्य किया। बिछिया विचार मंच एवं रानी दुर्गावती फाउंडेशन के माध्यम से महिला स्वास्थ्य शिविरों का आयोजन कर हजारों महिलाओं को लाभ पहुंचाया। ग्रामसभाओं में महिलाओं की भागीदारी बढ़ाने में भी उनका योगदान सराहनीय रहा है।
अंतरराष्ट्रीय स्तर पर भी रागिनी परते ने नारी शक्ति की आवाज बुलंद की। वर्ष 2023 में वे इंडियन स्कूल ऑफ डेमोक्रेसी के लिए चयनित हुईं। अगस्त 2025 में सीजन-2 के दौरान राजनीतिक, सामाजिक और आर्थिक मूल्यों पर उत्कृष्ट कार्य के लिए मध्यप्रदेश को प्रथम स्थान मिला, जिसका प्रतिनिधित्व उन्होंने किया। नवंबर 2025 में मुंबई में आयोजित सीजन-3 में महिला-वाडी राजनीति विषय पर मध्यप्रदेश का प्रतिनिधित्व किया।
इसी क्रम में 5 दिसंबर 2025 को संयुक्त राष्ट्र संघ के अंतरराष्ट्रीय मंच पर चयनित जनप्रतिनिधि के रूप में मध्यप्रदेश का प्रतिनिधित्व करते हुए उन्हें सम्मानित किया गया। दिसंबर 2025 में उन्हें राजीव गांधी पंचायती राज संगठन का महामंत्री भी नियुक्त किया गया।
रागिनी परते इस सफलता का श्रेय अपने गांव, क्षेत्र, जिले, प्रदेश और देश की महिलाओं को देती हैं। उनका कहना है—
“जब महिलाएं जागरूक होंगी, तभी समाज का सच्चा विकास संभव है।”
मंडला जिले से निकली यह प्रेरणादायी कहानी आज महिला सशक्तिकरण की नई दिशा और नई उम्मीद बनकर सामने आई है