गुना-यह कहानी किसी फिल्म की स्क्रिप्ट नहीं, बल्कि उस हकीकत की है जिसमें खाकी वर्दी अपराध की ढाल बन गई। यह कहानी है रामवीर सिंह कुशवाह उर्फ रामवीर दाऊ की- जिसका नाम कभी पारदी अपराधों पर नकेल कसने वाले ‘सुपर कॉप’ के रूप में लिया जाता था और जो आज आत्माराम पारदी केस में जेल में है। मामला चर्चा में इसलिए है कि कभी पारदी गैंग में रहे आत्माराम पारदी की आत्महत्या का मामला सुप्रीम कोर्ट पहुंच गया है। इस मामले में अगले साल सुनवाई तय है, लेकिन इस बहाने रामवीर सिंह का मामला फिर गर्मा गया है...।
1997–2004: सिपाही से ‘सुपर कॉप’ बनने तक : रामवीर सिंह कुशवाह 1997 में मध्यप्रदेश पुलिस में आरक्षक के रूप में भर्ती हुआ। शुरुआती पोस्टिंग गुना जिले में रही। 2004 में श्रीराम कॉलोनी में हुए चिंटू उर्फ राजकुमार शर्मा एनकाउंटर ने उसकी किस्मत बदल दी। एनकाउंटर टीम को आउट ऑफ टर्न प्रमोशन मिला और रामवीर सीधे हेड कांस्टेबल बन गया। यहीं से पुलिस सिस्टम में उसकी पहचान एक तेज और असरदार अफसर के रूप में बनने लगी। इसके बाद वह कुछ समय शिवपुरी में एडी और एसटीएफ में रहा। 2010 में एएसआई और 2014 में प्रमोशन पाकर एसआई बनकर वह दोबारा गुना लौटा। यही वह दौर था, जब रामवीर का रसूख तेजी से बढ़ा।
वर्दी से पहले रुतबा... पुलिस महकमे में यह चर्चा आम थी कि जब तक कंधे पर सितारे नहीं लगे, रामवीर वर्दी नहीं पहनता था। ओपन जीप में बंदूकधारी गार्डों के साथ चलना, अफसरों से ठसक में बात करना और ट्रांसफर–पोस्टिंग की चर्चाओं में बने रहना उसकी पहचान बन चुका था। पुलिस सूत्र बताते हैं कि देश में कहीं भी पारदी पैटर्न की डकैती होती, तो सबसे पहले रामवीर का नाम लिया जाता। पारदी गैंग से रिश्ता और अपराधों का नेटवर्क : गुना जिले के पारदी समुदाय के लोग लंबे समय से देशभर में डकैती और संगठित अपराधों के लिए कुख्यात रहे हैं। आत्माराम की आत्महत्या से रामवीर का क्या कनेक्शन? आत्माराम पारदी गुना जिले का रहने वाला था और पारदी गैंग से जुड़ा था। आरोप है कि 2015-16 में वह रामवीर के लिए खतरा बन गया। जांच में सामने आया कि आत्माराम को प्रताड़ित किया गया, गोली चलने की घटना में रामवीर की भूमिका रही। घायल आत्माराम को गाड़ी में डालकर ले जाया गया, जिसके बाद वह लापता हो गया। मामला दो साल दबा रहा। 2017 में हैबियस कॉर्पस, 2019 में एफआईआर और जांच सीआईडी को दी गई। इसके बाद रामवीर दाऊ पर आत्महत्या के लिए उकसाने, हत्या से जुड़ी भूमिका, गवाहों को धमकाने, सबूत मिटाने और पद के दुरुपयोग के आरोप लगे और 7 केस दर्ज हुए। रामवीर फरार होकर भगोड़ा घोषित हुआ। सितंबर 2024 में हाई कोर्ट से जमानत के बाद गुना लौटा, जहां वीडियो वायरल हुए। इसके बाद एसपी अंकित सोनी के निर्देश पर स्पेशल टीम ने उसे गिरफ्तार किया।